భారత్ వర్సెస్ ఆస్ట్రేలియా: క్రికెట్ యుద్ధం!
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मेरा बचपन 80 के दशक में बीता। उस दौर में, हर घर में राजेश खन्ना की चर्चा थी। उनकी फिल्में, उनके गाने, उनकी अदाएं... सब कुछ लोगों के दिलों पर राज करता था। मुझे याद है, मेरी माँ उनकी बहुत बड़ी फैन थीं। उनकी हर फिल्म देखना, हर गाना सुनना, उनके लिए एक त्यौहार जैसा होता था।
राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर, 1942 को अमृतसर में हुआ था। उनका असली नाम जतिन खन्ना था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1966 में 'आखिरी खत' फिल्म से की थी। लेकिन, उन्हें असली पहचान 1969 में आई फिल्म 'आराधना' से मिली। इस फिल्म ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया।
और फिर शुरू हुआ राजेश खन्ना का सुनहरा दौर। उन्होंने एक के बाद एक कई सुपरहिट फिल्में दीं। 'दो रास्ते', 'कटी पतंग', 'आनंद', 'अमर प्रेम', 'बावर्ची', 'नमक हराम'... ये कुछ ऐसी फिल्में हैं, जिन्हें आज भी लोग याद करते हैं। उनकी फिल्मों में रोमांस, ड्रामा, कॉमेडी और इमोशन का एक बेहतरीन मिश्रण होता था।
राजेश खन्ना की सबसे बड़ी खासियत थी उनकी अदाकारी। उनकी आँखों में एक अजीब सी कशिश थी, जो दर्शकों को अपनी ओर खींचती थी। उनके बोलने का अंदाज, उनके चलने का तरीका, सब कुछ बेहद खास था। उन्होंने अपनी एक्टिंग से हर किरदार को जीवंत कर दिया।
फिल्म 'आनंद' में उन्होंने एक कैंसर पीड़ित व्यक्ति का किरदार निभाया था। उस किरदार को उन्होंने इतनी संजीदगी से निभाया कि लोग आज भी उसे देखकर भावुक हो जाते हैं। फिल्म "अमर प्रेम" में उनका डायलॉग "पुष्पा, आई हेट टीयर्स" आज भी लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है।
राजेश खन्ना सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक ट्रेंडसेटर भी थे। उनके कपड़े, उनके हेयरस्टाइल, उनके चश्मे... सब कुछ युवाओं के बीच पॉपुलर हो गया था। लड़कियां उनके नाम के खत लिखती थीं और उन्हें खून से रंग देती थीं। राजेश खन्ना की दीवानगी का आलम ये था कि उनकी कार जहां से गुजरती थी, लड़कियां उसे चूम लेती थीं।
लेकिन, हर सितारे का एक वक्त होता है। 80 के दशक के बाद, राजेश खन्ना का स्टारडम धीरे-धीरे कम होने लगा। नई पीढ़ी के अभिनेताओं का उदय हो रहा था और राजेश खन्ना को अपनी जगह बनाए रखने में मुश्किल हो रही थी। उन्होंने कई फिल्में कीं, लेकिन उन्हें पहले जैसी सफलता नहीं मिली।
हालांकि, राजेश खन्ना ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने 90 के दशक में राजनीति में भी कदम रखा और कुछ समय के लिए सांसद भी रहे। उन्होंने अपने जीवन के आखिरी दिनों तक एक्टिंग करना नहीं छोड़ा।
18 जुलाई, 2012 को राजेश खन्ना का निधन हो गया। उनके निधन से हिंदी सिनेमा को एक बहुत बड़ा नुकसान हुआ। लेकिन, उनकी यादें, उनकी फिल्में, उनके गाने हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे। राजेश खन्ना एक अमर सितारा थे, हैं और हमेशा रहेंगे।
आज की पीढ़ी शायद राजेश खन्ना के जादू को पूरी तरह से नहीं समझ पाएगी। लेकिन, मैं उन्हें यही कहना चाहूंगा कि एक बार उनकी फिल्में जरूर देखें। उनके गाने सुनें। उनकी अदाकारी को देखें। आप समझ जाएंगे कि क्यों राजेश खन्ना को 'काका' कहा जाता था। क्यों वो हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार थे।
राजेश खन्ना का जीवन एक खुली किताब की तरह था। उन्होंने अपनी सफलता और असफलता दोनों को खुलकर जिया। उन्होंने हमें सिखा
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