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read moreदेवउठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की निद्रा के बाद जागते हैं। इन चार महीनों को चतुर्मास कहा जाता है, जो आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलता है। देव उठानी एकादशी के साथ ही विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं, जो चतुर्मास के दौरान बंद रहते हैं।
देवउठनी एकादशी का आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टियों से बहुत महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के जागने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह दिन नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। किसान इस दिन अपनी फसल की कटाई शुरू करते हैं और व्यापारी नए व्यवसाय की शुरुआत करते हैं। देव उठानी एकादशी पारिवारिक और सामाजिक बंधनों को मजबूत करने का भी एक अवसर है।
मेरे दादाजी हमेशा कहा करते थे कि देवउठनी एकादशी एक नई शुरुआत का प्रतीक है। वे बताते थे कि कैसे इस दिन के बाद गांव में हर तरफ उत्साह और उमंग का माहौल छा जाता था। खेत खलिहानों में रौनक लौट आती थी और घरों में शादी-ब्याह की तैयारियां शुरू हो जाती थीं। यह दिन न केवल भगवान विष्णु के जागने का प्रतीक है, बल्कि हमारे जीवन में नई उम्मीदों और संभावनाओं के जागने का भी प्रतीक है।
देवउठनी एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं। आमतौर पर, यह त्योहार दिवाली के कुछ दिनों बाद आता है। इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व है।
शुभ मुहूर्त के बारे में जानकारी के लिए, स्थानीय पंडित या ज्योतिषी से परामर्श करना उचित रहता है। वे आपको सटीक तिथि और पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय बता सकते हैं।
देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं। पूजा में तुलसी का विशेष महत्व होता है, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं।
कुछ लोग इस दिन निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार व्रत रखते हैं। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार व्रत का पालन करना चाहिए। व्रत रखने का उद्देश्य मन को शुद्ध करना और भगवान विष्णु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करना है। देव उठानी एकादशी
देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का भी आयोजन किया जाता है। तुलसी को माता लक्ष्मी का रूप माना जाता है और उनका विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप से कराया जाता है। यह विवाह हिन्दू धर्म में बहुत शुभ माना जाता है और इसे करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
तुलसी विवाह का आयोजन आमतौर पर मंदिरों और घरों में किया जाता है। तुलसी के पौधे को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और शाल
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