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read moreदेव उठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन भगवान विष्णु के चार महीने के शयन काल के बाद जागने का प्रतीक है। इन चार महीनों के दौरान, विवाह और अन्य शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। देव उठनी एकादशी के बाद, सभी शुभ कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं।
देव उठनी एकादशी का धार्मिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टियों से बहुत महत्व है। धार्मिक रूप से, यह दिन भगवान विष्णु की पूजा और आराधना के लिए समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सामाजिक रूप से, देव उठनी एकादशी के बाद विवाह और अन्य शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं। यह त्योहार परिवार और दोस्तों को एक साथ लाता है और खुशियां बांटने का अवसर प्रदान करता है। खासकर, देव उठनी एकादशी के आस-पास का माहौल बहुत ही उत्सवमय होता है।
देव उठनी एकादशी 2024 में [वर्ष डालें] को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि [तिथि डालें] को [समय डालें] बजे शुरू होगी और [तिथि डालें] को [समय डालें] बजे समाप्त होगी।
देव उठनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा विधि-विधान से की जाती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर, एक साफ स्थान पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
भगवान विष्णु को फल, फूल, मिठाई और अन्य सामग्री अर्पित करें। फिर, धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं। भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और आरती करें। अंत में, भगवान विष्णु को भोग लगाएं और प्रसाद वितरित करें।
कई लोग इस दिन निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार व्रत रखते हैं। व्रत रखने वाले लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत खोलते हैं।
देव उठनी एकादशी से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है। एक बार, एक राजा ने भगवान विष्णु से वरदान मांगा कि वे हमेशा उसके साथ रहें। भगवान विष्णु ने राजा की प्रार्थना स्वीकार कर ली और उसके साथ रहने लगे।
एक दिन, राजा ने भगवान विष्णु को एक शर्त दी कि वे चार महीने के लिए सो जाएंगे और फिर जागेंगे। भगवान विष्णु ने राजा की शर्त मान ली और चार महीने के लिए सो गए।
जब भगवान विष्णु जागे, तो राजा ने उन्हें धन्यवाद दिया और उन्हें फिर से अपने साथ रहने के लिए कहा। भगवान विष्णु ने राजा की प्रार्थना स्वीकार कर ली और हमेशा उसके साथ रहने लगे। यही कारण है कि देव उठनी एकादशी को भगवान विष्णु के जागने के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देव उठनी एकादशी का विशेष महत्व होता है।
देव उठनी एकादशी का व्रत रखने के कुछ नियम हैं जिनका पालन करना आवश्यक है:
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